عن ابن عباس رضي الله عنهما مرفوعاً: «إنَّ الرَّحِمَ شِجْنَةٌ آخذةٌ بحُجْزَةِ الرَّحمنِ، يَصِلُ مَن وَصَلَها، ويقطعُ مَن قَطَعَها».
[صحيح] - [رواه أحمد]
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अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “रहिम (रिश्ता) रहमान के 'हुजज़ा' (तहबंद बाँधने के स्थान) को पकड़े हुआ है। जो उसे जोड़ेगा, रहमान उसे ज़ोड़ेगा और जो उसे तोड़ेगा, रहमान उसे तोड़ेगा।”
सह़ीह़ - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

व्याख्या

रहिम' यानी खूनी रिश्ते का सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह से संबंध है। क्योंकि उसका नाम अल्लाह के नाम 'रहमान' से लिया गया है। मूल रूप से यह हदीस अल्लाह के गुणों वाली हदीसों में से एक है, जिनके बारे में विद्वानों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें उसी तरह मान लिया जाना चाहिए, जिस तरह वह आई हुई हैं। उन्होंने इन हदीसों के आशय का इनकार करने वालों का खंडन भी किया है। 'हुजज़ा' यानी तहबंद बाँधने की जगह भी अल्लाह के उन गुणों में से एक है, जिनपर विश्वास रखना वाजिब है और उनके अर्थ के साथ छेड़छाड़, इस संदर्भ में प्रयुक्त शब्द को अर्थविहीन बनाना, उनकी कैफ़ियत बयान करना और उपमा देना जायज़ नहीं है। हम इस बात पर ईमान रखेंगे कि रहिम यानी खूनी रिश्ता रहमान के हुजज़ा को पकड़े हुए है और अल्लाह उसे जोड़ता है जो खूनी रिश्ता जोड़े और उसे काटता है जो यह रिश्ता काटे। फिर जिसे अल्लाह काट दे, वह कटा हुआ और अल्लाह के दुश्मन शैतान के साथ होता है, जिसे सारी सृष्टि भी जोड़ना तथा लाभान्वित करना चाहे, तो उसका कुछ भला होने वाला नहीं है।

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