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  3. फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

हदीस जिसने सूरज निकलने से पहले सुबह की एक रकात पाई, उसने सुबह की नमाज़ पा ली और जिसने सूरज डूबने से पहले अस्र की एक रकत पाई, उसने अस्र की नमाज़ पा ली

عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:«مَنْ أَدْرَكَ مِن الصُّبح ركعة قبل أن تَطْلُعَ الشمس فقد أَدْرَكَ الصُّبح، ومن أَدْرَكَ ركعة من العصر قبل أن تَغْرُبَ الشمس فقد أَدْرَكَ العصر».

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जिसने सूरज निकलने से पहले सुबह की एक रकात पाई, उसने सुबह की नमाज़ पा ली और जिसने सूरब डूबने से पहले अस्र की एक रकात पाई, उसने अस्र की नमाज़ पा ली।

सह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

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