हदीसों की सूची
कोई स्त्री मृतक पर तीन दिनों से अधिक सोग नहीं मनाएगी। हाँ, अपने पति पर चार महीने दस दिन सोग मनाएगी। वह असब नामी यमनी वस्त्र छोड़कर कोई रंगा हुआ कपड़ा नहीं पहनेगी तथा सुरमा एवं ख़ुशबू नहीं लगाएगी। हाँ, जब पाक हो जाए तो कु़स्त या अज़फ़ार आदि खुशबूएँ लगा सकती है।
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जो स्त्री अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखती है, उसके लिए उचित नहीं है कि किसी मृत व्यक्ति पर तीन दिन से अधिक सोग मनाए, सिवाए पति के; उसपर चार माह दस दिन सोग मना सकती है।
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नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के युग में साबित बिन क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहु) की पत्नी ने उनसे ख़ुला ले लिया, तो आपने ने उन्हें एक माहवारी तक इद्दत में रहने का आदेश दिया।
बरीरा (रज़ियल्लाहु अंहा) को आदेश दिया गया था कि तीन माहवारी तक इद्दत गुज़ारें।
जब किसी महिला का पति मृत्यु को प्राप्त हो जाता तो महिला छोटे से घर में बहुत ही खराब वस्त्र पहन कर रहती, न खुश्बू लगाती न कुछ और, यहाँ तक कि एक साल बीत जाता। फिर एक जानवर- गधा अथवा चिड़या अथवा बकरी- लाया जाता और उस से अपने जिस्म को रगड़ती।
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इद्दत के बारे में सुबैआ असलमी की हदीस।
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तुम अपने बाग के खजूर अवश्य तोड़ो। हो सकता है कि तुम सदक़ा करो या कोई और भलाई का कार्य करो।
"तुम इद्दत पूरी होने तक अपने उसी घर में रहो।" उनका कहना है कि फिर मैंने वहीं इद्दत के चार महीने दस दिन गुज़ारे।
फ़ातिमा बिंत क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहा) का यह कहना कि ऐ अल्लाह के रसूल, मेरे पति ने मुझे तीन तलाक़ दे दिए हैं और मुझे भय है कि कोई मेरे यहाँ ज़बरदस्ती घुस न आए। तो आपके आदेश से उन्होंने जगह बदल लिया।
तुम लोग हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत के बारे में संदेह में न डालो। उम्मे वलद (वह दासी जो अपने मालिक की संतान की माँ बन जाए) की इद्दत चार महीने दस दिन है।
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने हफ़सा बिंत अब्दुर्रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहा) को, जब उनकी तीसरी माहवारी शुरू हुई, घर बदलवा दिया।
दास आज़ाद स्त्री को दो तलाक़ देगा और वह तीन माहवारी इद्दत गु़ज़ारेगी, जबकि आज़ाद व्यक्ति दासी को दो तलाक़ देगा और वह आम दासियों की तरह दो माहवारी इद्दत गुज़ारेगी।
जिस स्त्री का पति गुम हो जाए और पता न चल सके कि वह कहाँ है? वह चार साल प्रतीक्षा करे और फिर चार महीना दस दिन इद्दत गुज़ारे। अब उसके लिए कहीं और निकाह करना हलाल हो जाएगा।
किसी गर्भवती से संभोग न किया जाए जब तक प्रसव न हो जाए और न किसी बिना गर्भ वाली से संभोग किया जाए जब तक उसे एक माहवारी न आ जाए।