عن عائشة -رضي الله عنها- قالت: تُوُفِّيَ رسول الله -صلى الله عليه وسلم- وما في بيتي من شيء يَأكُلُهُ ذُو كَبدٍ إلا شَطْرُ شَعير في رَفٍّ لي، فأكَلتُ منه حتى طال عليَّ، فَكِلْتُهُ فَفَنِيَ.
[صحيح.] - [متفق عليه.]
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आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मृत्यु हुई तो मेरे घर में कुछ नहीं था, जिसे कोई जानदार खाता। हाँ, मेरे पास एक ताक में थोड़ा-सा जौ रखा हुआ था, जिसे मैं लंबे समय तक खाती रही। (अंत में एक दिन) मैंने उसे नापा तो वह समाप्त हो गया।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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