عن عائشة -رضي الله عنها- أنها كانت تكره أن يجعل يده في خَاصِرَتِهِ، وتقول: إن اليهود تفعله.
[صحيح.] - [رواه البخاري.]
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आइशा (रज़ियल्लाहु अन्ह) से वर्णित है कि वह इस बात को नापसंद करती थीं कि कोई (नमाज़ पढ़ते समय) अपने हाथ को कोख पर रखे तथा कहा करती थीं कि यहूदी ऐसा करते हैं।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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