عن عبد الله بن وقدان السعدي قال: وَفَدْتُ إلى رسول الله -صلى الله عليه وسلم- في وفد كُلُّنَا يَطلبُ حَاجة، وكنتُ آخرهم دُخُولاً على رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، فقلتُ: يا رسول الله، إني تَركتُ من خلفي وهم يَزْعُمُون أنَّ الهجرة قد انقطعت، قال: «لا تنقطع الهجرة ما قُوتِلَ الكُفَّارُ».
[صحيح] - [رواه النسائي وأحمد]
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अब्दुल्लाह बिन वक़दान सादी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैंः हम एक प्रतिनिधि मंडल के साथ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचे। हममें से हर एक अपनी ज़रुरत लेकर आया था। मैं सबसे अंत में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के निकट पहुँचा। मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं अपने पीछे ऐसे लोगों को छोड़कर आया हूँ, जो यह समझते हैं कि हिजरत बंद हो गई है। आपने फ़रमायाः "हिजरत उस समय तक बंद नहीं होगी, जब तक काफ़िरों से युद्ध जारी रहेगा।"
सह़ीह़ - इसे नसाई ने रिवायत किया है।

व्याख्या

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