عن عائشة -رضي الله عنها-، قالت: «قُبِض رسولُ الله -صلى الله عليه وسلم- ورأسُه بين سَحْري ونَحْري»، قالت: «فلمَّا خَرَجَتْ نفْسُه، لم أَجِدْ ريحا قَطُّ أطْيَبَ منها».
[صحيح] - [رواه أحمد]
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आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से वर्णित है वह कहती हैं किः अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आत्मा उस समय निकाली गई जब आप का सिर मेरी गोद व सीने के बीच में था, जब आप की रूह निकली उस समय निकलने वाली सुगंध से उत्तम सुगंध की अनुभूति मेंने कभी नहीं पाया।
सह़ीह़ - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

व्याख्या

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नी आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- कहती हैं कि जब अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु हुई, तो आप उनके सीने पर टेक लगाए हुए थे। जब आपके प्राण पखेरू उड़ गए, तो उन्होंने इतनी अच्छी सुगंध महसूस की कि उससे अच्छी सुगंध उन्होंने कभी महसूस नहीं की।

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