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हदीस मैंने स्वप्न देखा कि मैं मिसवाक कर रहा हूँ। इतने में मेरे पास दो व्यक्ति आए। उनमें से एक दूसरे से बड़ा था। मैंने मिसवाक छोटे को दे दी, तो मुझसे कहा गया कि बड़े को दो। अतः मैंने मिसवाक उनमें से बड़े को दे दी।

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما أَنَّ النَّبِيَّ -صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ- قَالَ: «أراني في المنام أَتَسَوَّكُ بِسِوَاكٍ، فجاءني رجلان، أحدهما أكبر من الآخر، فَنَاوَلْتُ السِّوَاكَ الأصغرَ، فقيل لي: كَبِّرْ، فَدَفَعْتُهُ إلى الأكبر منهما».

अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "मैंने स्वप्न देखा कि मैं मिसवाक कर रहा हूँ। इतने में मेरे पास दो व्यक्ति आए। उनमें से एक दूसरे से बड़ा था। मैंने मिसवाक छोटे को दे दी, तो मुझसे कहा गया कि बड़े को दो। अतः मैंने मिसवाक उनमें से बड़े को दे दी।"

सह़ीह़ इसे बुख़ारी ने तालीक़न यक़ीन के सेग़े के साथ रिवायत किया है। - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

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