أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ مُتْعَةِ النِّسَاءِ يَوْمَ خَيْبَرَ، وَعَنْ أَكْلِ لُحُومِ الحُمُرِ الإِنْسِيَّةِ.
[صحيح] - [متفق عليه] - [صحيح البخاري: 4216]
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अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़ैबर के दिन निकाहे-मुताह (अस्थायी निकाह) तथा घरेलू गधे के मांस से मना किया था।
[सह़ीह़] - [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।]
शरीयत निकाह के ज़रिए सदा के लिए एक डोरी में बाँधना, प्रेम पैदा करना और परिवार का निर्माण करना चाहती है तथा उसने निकाह की कई ऐसी सूरतों को हराम क़रार दिया है, जो उसके उद्देश्य से मेल नहीं खातीं। यही कारण है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़ैबर के ज़माने में निकाह-ए-मुताह को हराम घोषित किया है। निकाह-ए-मुताह यह है कि आदमी किसी स्त्री से कुछ समय के लिए निकाह करे। वैसे शुरू-शुरू में इसे, कुछ मसलहतों के तहत, जायज़ रखा गया था। इसी तरह आपने घरेलू गधे, जो पाले जाते हैं, उनका मांस खाने से भी मना किया है।